पता नहीं,कुल साँसे अपनी
हम खरीद कर , लाये हैं !
कल का सूरज नहीं दिखेगा
आज समझ , ना पाए हैं !
भरी वेदना, मन में लेकर ,
कैसे समझ सकेंगे प्रीत ?
मूरखमन फिर चैन न पाए,जीवन भर अकुलायें गीत !
जीवन की कुछ भूलें ऐसी ,
याद , आज भी आती है !
भरी डबडबाई, वे ऑंखें ,
दिल में कसक जगाती हैं !
जीवन भर के बड़े वायदे ,
सपने खूब दिखाए मीत !
भुला के वादे,निश्छल दिल से,शर्मिन्दा हैं,मेरे गीत !
याद रहे , वे निर्मल सपने,
कुछ अपने से,कुछ गैरों से
दिवा स्वप्न जो हमने देखे
बिखर गए, भंगुर शीशे से
जीवन भर के कसम वायदे,
नहीं निभा पाए थे गीत !
अब क्यों यादे, उनकी आयें, क्यों पछताएं मेरे गीत ?
बड़े दिनों से बोझिल मन है
कर्जा चढ़ा, संगिनी का !
चलते थे अपराध बोध ले
मन में क़र्ज़ ,मानिनी का !
दारुण दुःख में साथ निभाएं,
कहाँ आज हैं,ऐसे मीत !
प्यार के करजे उतर न पायें ,खूब जानते मेरे गीत !
जीवन की कडवी यादों को
भावुक मन से भूले कौन ?
जीवन के प्यारे रिश्तों मे
पड़ी गाँठ, सुलझाए कौन ?
गाँठ पड़ी है,कसक रहेगी,
हर दम चुभता रहता तीर !
जानबूझ कर,धोखे देकर, कैसे नज़र झुकाते, गीत ?
हम खरीद कर , लाये हैं !

आज समझ , ना पाए हैं !
भरी वेदना, मन में लेकर ,
कैसे समझ सकेंगे प्रीत ?
मूरखमन फिर चैन न पाए,जीवन भर अकुलायें गीत !
जीवन की कुछ भूलें ऐसी ,
याद , आज भी आती है !
भरी डबडबाई, वे ऑंखें ,
दिल में कसक जगाती हैं !
जीवन भर के बड़े वायदे ,
सपने खूब दिखाए मीत !
भुला के वादे,निश्छल दिल से,शर्मिन्दा हैं,मेरे गीत !
याद रहे , वे निर्मल सपने,
कुछ अपने से,कुछ गैरों से
दिवा स्वप्न जो हमने देखे
बिखर गए, भंगुर शीशे से
जीवन भर के कसम वायदे,
नहीं निभा पाए थे गीत !
अब क्यों यादे, उनकी आयें, क्यों पछताएं मेरे गीत ?
बड़े दिनों से बोझिल मन है
कर्जा चढ़ा, संगिनी का !
चलते थे अपराध बोध ले
मन में क़र्ज़ ,मानिनी का !
दारुण दुःख में साथ निभाएं,
कहाँ आज हैं,ऐसे मीत !
प्यार के करजे उतर न पायें ,खूब जानते मेरे गीत !
जीवन की कडवी यादों को
भावुक मन से भूले कौन ?
जीवन के प्यारे रिश्तों मे
पड़ी गाँठ, सुलझाए कौन ?
गाँठ पड़ी है,कसक रहेगी,
हर दम चुभता रहता तीर !
जानबूझ कर,धोखे देकर, कैसे नज़र झुकाते, गीत ?