
पंखों से, उड़ जाना उसने
प्यार बांटकर हँसते हँसते \
परियों सा खो जाना उसने
स्वर्णपरी कुछ दिन आकर ही,
सबको सिखा गयी थी गीत !
सबको सिखा गयी थी गीत !
कहाँ खो गयी, हंसी तुम्हारी ,किसने छीन लिया संगीत ?
ऐसा लगता , हँसते गाते
तुझको कोई छीन ले गया !
एक निशाचर,सोता पाकर
घर से तुमको उठा ले गया !
जबसे तूने छोड़ा हमको,
शोक मनाते मेरे गीत !
जबसे तूने छोड़ा हमको,
शोक मनाते मेरे गीत !
सोते जगते, अब तेरी, तस्वीर बनाएं मेरे गीत !
काश कभी तो सोंचा होता
इतनी बुरी रात आयेगी ,
इतनी बुरी रात आयेगी ,
नाम बदलते,तुझे छिपाते
बुरी घडी भी कट जायेगी !
बुरी घडी भी कट जायेगी !
बड़े शक्तिशाली बनते थे ,
बचा न पाए तुझको गीत !
रक्त भरे वे बाल तुम्हारे , कभी न भूलें मेरे गीत !
ऐसा पहली बार हुआ था
हंसकर उसने नहीं बुलाया
हम सब उसके पास खड़े थे
उसने हमको, नहीं बिठाया !
बिलख बिलख कर रोये हम सब,
टूट न पाई उसकी नींद !
उठ जा बेटा तुझे जगाते , सिसक सिसक कर रोये गीत !
कितनी सीधी कितनी भोली
हम सब की हर बात मानती
बच्चों जैसी, लिए सरलता,
स्वागत करने हंसती आती !
जब जब, तेरे घर पर जाते,
तुझको ढूंढें मेरे गीत !
हर मंगल उत्सव पर बच्चे, शोक मनाएं मेरे गीत !
जाकर भी वरदान दे गयी
श्री धर पुत्री, दुनिया को !
खुद केशव की रक्षा करके ,
दान दे गयी , दुनिया को !
बचा न पाए तुझको गीत !
रक्त भरे वे बाल तुम्हारे , कभी न भूलें मेरे गीत !
ऐसा पहली बार हुआ था
हंसकर उसने नहीं बुलाया
हम सब उसके पास खड़े थे
उसने हमको, नहीं बिठाया !
बिलख बिलख कर रोये हम सब,
टूट न पाई उसकी नींद !
उठ जा बेटा तुझे जगाते , सिसक सिसक कर रोये गीत !
हम सब की हर बात मानती
बच्चों जैसी, लिए सरलता,
स्वागत करने हंसती आती !
जब जब, तेरे घर पर जाते,
तुझको ढूंढें मेरे गीत !
हर मंगल उत्सव पर बच्चे, शोक मनाएं मेरे गीत !
जाकर भी वरदान दे गयी
श्री धर पुत्री, दुनिया को !
खुद केशव की रक्षा करके ,
दान दे गयी , दुनिया को !
बचपन अंतिम , साँसे लेता ,
सन्न रह गये सारे गीत !
देवकि पुत्री के जीवन को ,बचा न पाए मेरे गीत !
सन्न रह गये सारे गीत !
देवकि पुत्री के जीवन को ,बचा न पाए मेरे गीत !