Friday, August 03, 2012

काश कहीं से, मना के लायें , मेरी माँ को , मेरे गीत !

सबसे पहले,हमें सुलाते
गीत सुनाया , अम्मा ने !
थपकी दे दे कर,बहलाते
आंसू पोंछे , अम्मा ने !
सुनते सुनते निंदिया आई,आँचल से निकले थे गीत !
उन्हें आज तक भुला न पाये , बड़े मधुर थे मेरे गीत ! 

आज तलक वह मद्धम स्वर

कुछ याद दिलाये, कानों में !
मीठी  मीठी  लोरी  की  धुन ,
आज   भी  आये, कानों  में !
आज मुझे जब नींद न आये,कौन सुनाये आ के गीत ?
काश कहीं से, मना के लायें , मेरी माँ को , मेरे गीत !


मुझे याद है ,थपकी देकर,
माँ कुछ याद दिलाती थी !
सिर्फ गुनगुनाहट सुनकर ही, 
आँख बंद हो जाती थी !
आज वह लोरी, उनके स्वर में, कैसे गायें , मेरे गीत !
कहाँ से लाऊं,उस थपकी को,माँ की याद दिलाएं गीत !

अक्सर पेन पेन्सिल लेकर

माँ कैसी थी ?चित्र बनाते,
पापा इतना याद न आते
पर जब आते, खूब रुलाते !
उनके गले में,  बाहें डाले ,  खूब   झूलते , मेरे  गीत !
पिता की उंगली पकडे पकडे,चलाना सीखे मेरे गीत !

पिता में बेटा शक्ति ढूंढता   

उनके जैसा कोई न देखा !
भय के अंधकार के आगे 
उसने  उनको लड़ते देखा !  
वह स्वरुप,वह शक्ति देखकर,बचपन से ही था निर्भीक !
शक्ति पुरुष थे , पिता  हमेशा, उन्हें समर्पित मेरे गीत  !

राम रूप कुछ  विद्रोही  थे , 

चाहे कुछ हो,सर न झुकाएं
कुछ ऐसा कर पायें जिससे
घर में उत्सव रोज मनाएं !
सदा उद्यमी, जीवन उनका,रूचि रहस्यमय,निर्जन गीत !
कभी  कभी मेरे जीवन में,वे खुद ही,लिख  जाते  गीत !

शक्ति पिता से पायी मैंने,

करुणा , आई  माता  से  !
कोई कष्ट न पाए मुझसे ,
यह वर मिला विधाता से !
खाली हाथों आया था मैं , भर के गगरी , छोड़े गीत !
प्यासे पक्षी,बया,चिरैयाँ,सबकी प्यास बुझायें गीत !

ममता खोजे,बचपन जिनका
क्या उम्मीद लगायें , उनसे !
जिसने घर परिवार न जाना
क्या अरमान जगाएं  उनसे !
जो कुछ सिखलाया लोगों ने,वैसी ही बन पायी प्रीत !
आज कहाँ से, लेकर आयें , मीठी भाषा, मीठे गीत !

कभी किसी अंजुरी का पानी

इन होंठो  में पंहुच न पाया !
और किन्ही हाथों का कौरा
जिसके मुंह में,कभी न आया !
किसी गोद में देख लाडला,तड़प तड़प रह जाते गीत !
छिपा के आंसू,दिन में अपने, रातो रात जागते गीत !
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